Saturday, August 30, 2008

इधर देशभक्ति, उधर देशद्रोह

इस ओर जम्मू में तिरंगा तो कश्मीर में लहराते पाकिस्तानी झडे, यहां भारत माता की जय के नारे तो उधर भारत विरोधी नारे, यहां सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने की भावना तो वहां निजामे मुस्तफा लागू करने के मंसूबे ने जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर भारतीय व पाकिस्तान समर्थक विचारधारा में टकराव को उजागर कर दिया है।

इस समय राज्य के दोनों हिस्सों में एक जैसे निर्देशों, एक मकसद के साथ शांति कायम करने में जुटी सेना व सुरक्षाबलों को भी अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। जम्मू में प्रदर्शन करने वालों के हाथ में तिरंगे हैं तो कश्मीर में आजादी के नारे लगाकर लोगों को गुमराह करने वालों के हाथों में पाकिस्तान के झंडे हैं।

जम्मू में उग्र प्रदर्शनों का सिलसिला समाप्त होने के बाद यहां देशभक्त लोगों के नियंत्रित आंदोलन के प्रति सेना पूरा संयम बरत रही है। सैन्य सूत्रों के अनुसार यहां इस समय मुख्य चुनौती यह है कि शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे लोगों की आड़ में कहीं आतंकी अपने मंसूबों में कामयाब न हो जाएं।

जम्मूवासी सांप्रदायिक सौहार्द में विश्वास रखते हैं। इसका सबूत यहां संघर्ष का नेतृत्व कर रही संघर्ष समिति के साथ आंदोलन में हिस्सा लेने वाली पार्टियों का लगातार लोगों को सौहार्द बनाए रखने की अपील करना है। वहीं घाटी में राजनीतिक आकांक्षाओं की पूर्ति के लिए माहौल को सांप्रदायिक बनाने के लिए एक के बाद एक कोशिश की जा रही है। यह कहना है कई युद्धों में भाग लेने के साथ-साथ वर्ष 1981 में राष्ट्रपति के मिलिट्री सेक्रेटरी व पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सुरक्षा का जिम्मा संभाल चुके सेवानिवृत्त मेजर जनरल गोवर्धन सिंह जम्वाल का। उनका कहना है कि जम्मू में पिछले छह दशकों से कश्मीर केंद्रित सरकारों के भेदभाव का शिकार हुए लोगों का गुस्सा भूमि आंदोलन के रूप में फूटा है, वहीं कश्मीर में निहित स्वार्थ के लिए पाकिस्तान के प्रायोजित एजेंडे को परोसा जा रहा है। उनका कहना है कि जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पूरी तरह से खुला होने के बाद भी घाटी में मुजफ्फराबाद मार्च इसका सबूत हैं।

उधर, जम्मू के आंदोलन को सांप्रदायिक करार देने वालों पर एजेंडा-आधारित राजनीति करने का आरोप लगाते हुए पूर्व मंत्री व पैंथर्स पार्टी के नेता हर्षदेव सिंह ने कहा कि इस समय जम्मू व कश्मीर में भारतवादी व पाकिस्तान की विचारधारा का टकराव हो रहा है। उनका कहना है कि यहां संघर्ष में हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सभी साथ हैं पर वहां भूमि विवाद की आड़ में अपने देश विरोधी एजेंडे निकालने वाले लोग वही हैं जो चार लाख कश्मीरी पंडितों को घाटी से निकालने, हिंदुओं के मंदिरों को तोड़ने के बाद अब कह रहे हैं कि जम्मू सांप्रदायिक है।


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